मंदिर ट्रस्ट पर करोड़ों के घोटाले के आरोप, कलेक्टर ने बनाई जांच टीम

जनसुनवाई में उठी आवाज ने पकड़ा तूल, जमीन, नीलामी और लेनदेन पर गंभीर सवाल; प्रशासन ने शुरू की विस्तृत जांच

नर्मदापुरम/सिवनी मालवा। सिवनी मालवा तहसील के ग्राम बराखड़ कला में स्थित मंदिर ट्रस्टों को लेकर उठे विवाद ने अब बड़ा प्रशासनिक रूप ले लिया है। जनसुनवाई में पेश शिकायतों के बाद कलेक्टर नर्मदापुरम ने मामले को गंभीर मानते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। आरोप है कि श्री महावीर जी मंदिर ट्रस्ट क्रमांक 22155 और राम जानकी राधा कृष्ण मंदिर ट्रस्ट क्रमांक 232/55 में जमीन के उपयोग, नीलामी प्रक्रिया, कॉलोनी विकास और वित्तीय लेनदेन में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं। इन आरोपों के सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और लोगों की नजरें अब जांच रिपोर्ट पर टिक गई हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई: जांच दल का गठन और स्पष्ट निर्देश
कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्च स्तरीय जांच दल गठित किया गया है। इस दल का नेतृत्व डिप्टी कलेक्टर नर्मदापुरम को सौंपा गया है, जबकि तहसीलदार सिवनी मालवा, नायब तहसीलदार और अन्य राजस्व अधिकारी इसमें सदस्य बनाए गए हैं। टीम को निर्देशित किया गया है कि ट्रस्ट से जुड़े सभी वित्तीय, प्रशासनिक और भूमि संबंधी मामलों की बारीकी से जांच कर ठोस तथ्य सामने लाए जाएं। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आरोपों का दायरा: जमीन से लेकर दान राशि तक सवाल
शिकायतों में कहा गया है कि मंदिर ट्रस्ट की भूमि का उपयोग नियमों के विपरीत किया गया है और नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा है। आरोप है कि ट्रस्ट की जमीन को बिना उचित प्रक्रिया के उपयोग में लिया गया, कॉलोनियां विकसित की गईं और दुकानों का निर्माण कर आर्थिक लाभ कमाया गया। इसके साथ ही दान और धार्मिक आयोजनों से प्राप्त राशि के उपयोग पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इन सभी लेनदेन का स्पष्ट और पारदर्शी हिसाब उपलब्ध नहीं कराया गया।

भूमि उपयोग, अतिक्रमण और निर्माण पर विवाद गहराया
मामले में यह भी आरोप सामने आया है कि ट्रस्ट की भूमि पर नाले के ऊपर अतिक्रमण कर निर्माण किए गए हैं और बिना अनुमति दुकानों का संचालन हो रहा है। कॉलोनी विकास के नाम पर जमीन का उपयोग किस प्रक्रिया के तहत हुआ, इस पर भी संदेह जताया गया है। इन सभी बिंदुओं ने मामले को और गंभीर बना दिया है, जिसके चलते प्रशासन ने तत्काल जांच टीम गठित कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

शिकायतकर्ता नीरज तिवारी का पक्ष: “आस्था के नाम पर निजी लाभ बर्दाश्त नहीं”
शिकायतकर्ता नीरज तिवारी ने आरोप लगाते हुए कहा कि मंदिर ट्रस्ट की संपत्तियों का उपयोग निजी हितों के लिए किया जा रहा है। उनका कहना है कि वर्षों से ट्रस्ट की जमीन और आय का सही उपयोग नहीं हुआ और आम जनता से यह जानकारी छिपाई गई। तिवारी ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता और विश्वास कायम रह सके।

मंदिर ट्रस्ट की ओर से यज्ञेश तिवारी का जवाब: “सभी आरोप निराधार, नियमों के तहत हुआ हर कार्य”
वहीं मंदिर ट्रस्ट की ओर से यज्ञेश तिवारी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट द्वारा किए गए सभी कार्य शासन के नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार ही किए गए हैं। भूमि उपयोग, नीलामी और निर्माण से जुड़े सभी निर्णय विधिवत स्वीकृति के बाद ही लिए गए हैं। तिवारी ने कहा कि ट्रस्ट का उद्देश्य केवल धार्मिक और सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ाना है, न कि किसी प्रकार का निजी लाभ लेना। उन्होंने भरोसा जताया कि जांच में सच्चाई सामने आएगी और ट्रस्ट पूरी तरह निर्दोष साबित होगा।

स्थानीय जनता की निगाहें जांच पर, निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद
मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में चर्चा का माहौल है और सभी की निगाहें अब जांच टीम की रिपोर्ट पर टिकी हैं। लोगों का मानना है कि यदि अनियमितताएं साबित होती हैं तो जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, वहीं यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो ट्रस्ट की छवि भी स्पष्ट होनी जरूरी है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी और रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी।

error: Content is protected !!