10 सूत्रीय मांगों पर अड़े किसान, समाधान न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
सिवनी मालवा। सिवनी मालवा में शनिवार को किसानों का आक्रोश सड़कों पर खुलकर सामने आया, जब एक हजार से अधिक किसान अपनी विभिन्न मांगों को लेकर तहसील कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए। सुबह 11 बजे शुरू हुआ यह प्रदर्शन शाम करीब 4:30 बजे तक चला, जहां किसानों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अंत में किसानों ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्रशासन को सौंपते हुए तत्काल समाधान की मांग की।
खरीदी व्यवस्था और समर्थन मूल्य बना बड़ा मुद्दा
प्रदर्शन का केंद्र बिंदु फसल खरीदी में आ रही समस्याएं और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर असंतोष रहा। किसानों ने गेहूं उपार्जन में स्लॉट बुकिंग की तकनीकी दिक्कतों को तुरंत दूर करने और चना खरीदी में अंगूठा सत्यापन की बाध्यता खत्म कर OTP आधारित प्रणाली लागू करने की मांग की।
इसके साथ ही किसानों ने स्पष्ट कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर उपज की बिक्री पर सख्ती से रोक लगे और इसे दंडनीय अपराध घोषित किया जाए।
कर्ज, बीमा और मुआवजे को लेकर भी नाराजगी
किसानों ने अल्पकालीन कृषि ऋण जमा करने की अंतिम तिथि 15 मई तक बढ़ाने की मांग उठाई। साथ ही खरीफ 2025 और रबी 2025-26 की बीमा राशि तुरंत किसानों के खातों में जमा करने की बात कही।
नरवाई जलाने के नाम पर दर्ज केस और जुर्माने वापस लेने तथा आगजनी से फसल नुकसान को प्रधानमंत्री बीमा योजना में शामिल करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई।
सिंचाई और खाद व्यवस्था पर गंभीर आरोप
आंदोलन के दौरान किसानों ने नहर विभाग पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए कहा कि सिंचाई व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित नहीं की जा रही है। इससे फसलों को भारी नुकसान हो रहा है।
वहीं, खाद वितरण की वर्तमान टोकन व्यवस्था को खत्म कर पुरानी व्यवस्था लागू करने की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई।
सर्वेयरों पर भ्रष्टाचार के आरोप, हटाने की मांग
प्रदर्शन के बाद किसान नेताओं ने एसडीएम और विभागीय अधिकारियों से चर्चा की। इस दौरान किसानों ने खरीदी प्रक्रिया में लगे सर्वेयरों पर अवैध वसूली और गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए। किसानों ने मांग की कि ऐसे सर्वेयरों को तत्काल हटाया जाए।
“किसान सबसे कमजोर कड़ी बन गया” – समीत पटेल
किसान नेता समीत पटेल ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में किसान सबसे कमजोर कड़ी बन चुका है। उन्होंने फसल खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाने की मांग करते हुए कहा कि किसानों को बार-बार परेशान करना बंद किया जाए।
सरकार को सीधी चेतावनी
किसानों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। यह प्रदर्शन न केवल स्थानीय स्तर पर बढ़ते असंतोष को दर्शाता है, बल्कि प्रदेश में किसानों की स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
