नरवाई न जलाएं, पर्यावरण और मिट्टी की सेहत बचाएं : जनपद अध्यक्ष श्रीमती रेणुका मंडलोई एवं पूर्व जनपद अध्यक्ष मृगेंद्र सिंह मंडलोई की संयुक्त अपील

नरवाई न जलाएं, पर्यावरण और मिट्टी की सेहत बचाएं : जनपद अध्यक्ष श्रीमती रेणुका मंडलोई एवं पूर्व जनपद अध्यक्ष मृगेंद्र सिंह मंडलोई की संयुक्त अपील

सिवनी मालवा। खेतों में नरवाई (फसल अवशेष) जलाने की घटनाओं को रोकने और किसानों को जागरूक करने के उद्देश्य से जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रेणुका मंडलोई तथा पूर्व जनपद अध्यक्ष मृगेंद्र सिंह मंडलोई ने क्षेत्र के समस्त किसानों से एक भावनात्मक अपील की है। उन्होंने कहा है कि खेतों में नरवाई जलाने की प्रथा पर्यावरण के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति को भी गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा रही है। यह न केवल हवा में प्रदूषण फैलाती है, बल्कि खेतों में मौजूद उपयोगी जीवाणुओं को भी नष्ट कर देती है, जिससे भूमि की उत्पादकता वर्ष दर वर्ष घटती जा रही है।

श्रीमती रेणुका मंडलोई ने कहा कि “हमारा किसान मेहनती और संवेदनशील है। अगर उसे सही दिशा में जानकारी दी जाए तो वह निश्चित ही पर्यावरण संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। नरवाई जलाने से जहां आसपास का वातावरण धुएं से भर जाता है, वहीं पशुओं, बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। इसलिए आवश्यक है कि हम सब मिलकर इस आदत को बदलें और खेतों में नरवाई को जलाने के बजाय उसे खाद के रूप में प्रयोग करें।” उन्होंने कहा कि नरवाई खेत की संपत्ति है, इसे जलाने के बजाय मशीनों की सहायता से खेत में मिलाकर जैविक खाद बनाया जा सकता है, जो भूमि की गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।

वहीं पूर्व जनपद अध्यक्ष मृगेंद्र सिंह मंडलोई ने कहा कि “नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान का सीधा असर किसान की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। मिट्टी की ऊपरी परत जलने से उसमें मौजूद पोषक तत्व समाप्त हो जाते हैं, जिससे अगली फसल की पैदावार घटती है। इसके साथ ही यह प्रक्रिया वायु प्रदूषण को भी बढ़ाती है, जिससे जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्याएं और बढ़ रही हैं। इसलिए हर किसान को समझना चाहिए कि नरवाई जलाना किसी समस्या का समाधान नहीं, बल्कि आने वाले समय में और बड़ी समस्या का कारण बन सकता है।”

उन्होंने कहा कि शासन और कृषि विभाग किसानों की सहायता के लिए अनेक योजनाएं चला रहे हैं, जिनमें नरवाई प्रबंधन हेतु मशीनों पर अनुदान भी दिया जाता है। किसानों को चाहिए कि वे इन योजनाओं का लाभ उठाएं और जागरूक होकर अपने खेतों की मिट्टी की सेहत सुधारें। उन्होंने ग्राम पंचायतों और जनप्रतिनिधियों से भी आग्रह किया कि वे इस विषय पर गांव-गांव में जनजागरण अभियान चलाएं ताकि हर किसान इस विषय की गंभीरता को समझ सके।

अंत में दोनों जनप्रतिनिधियों ने कहा कि “धरती माता की रक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है। यदि आज हमने अपनी भूमि की रक्षा नहीं की, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी।” उन्होंने सभी किसानों से विनम्र अनुरोध किया है कि वे नरवाई न जलाएं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और भूमि की उर्वरता बनाए रखने में अपना योगदान दें।

यह केवल एक अपील नहीं, बल्कि भविष्य को सुरक्षित रखने का संकल्प है।

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