सिवनी मालवा। “आज के समय में घरों में बास्तु दोष कम हैं, परंतु बाक्य दोष हर घर में है।”
यह प्रेरणादायी विचार पं. नीरज महाराज ने सिवनी मालवा के वानापुरा में गोयल परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान बालकृष्ण जन्मोत्सव पर व्यक्त किए।
पं. नीरज महाराज ने कहा कि “बास्तु दोष का उपाय तो संभव है, परंतु बाक्य दोष — यानी वाणी का दोष — का कोई उपाय नहीं दिखता।”
उन्होंने आज के समाज की सबसे बड़ी विडंबना बताते हुए कहा कि शिक्षित और सभ्य कहलाने वाला समाज भी असभ्य व्यवहार करने लगा है। संतानें विवाह के उपरांत अपने वृद्ध माता-पिता को अलग कर देती हैं या वृद्धाश्रम में छोड़ आती हैं — यह अत्यंत दुखद और निंदनीय है।
महाराजश्री ने भावुक होते हुए कहा —
“जीवन में कुछ लोग पसंद से मिलते हैं, पर माता-पिता तो केवल पुण्य से ही मिलते हैं। हमें अपनी पसंद के पीछे अपने पुण्य को नहीं छोड़ना चाहिए।”
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि महाभारत जैसी महायुद्ध भी द्रौपदी के एक ‘बाक्य दोष’ से ही प्रारंभ हुई थी — जब उसने कहा था, “अंधे का पुत्र भी अंधा होता है।”
पं. नीरज महाराज ने कहा कि “वाणी का घाव तलवार के घाव से भी गहरा होता है।”
उन्होंने कहा कि “समुद्र मंथन से जो अमृत निकला, वह सभी जीवात्माओं से परे था; किंतु इस धरती पर मां और गाय ने उस अमृत को हमारे लिए अधर-अमृत बनाकर हमें पोषित किया। धर्म और अमृत के मामले में जब राक्षस भी एक हो गए थे, तो हम मनुष्य होकर क्यों विभाजित रहें?”
महाराजश्री ने आगे कहा कि “घर की लड़ाई का समझौता सरल होता है, पर धर्म की लड़ाई का समझौता कठिन। हमें जीवन में केवल संख्या (Quantity) नहीं, बल्कि गुण (Quality) में भी श्रेष्ठ होना चाहिए। कौरवों के पास संख्या और श्रीकृष्ण की सेना दोनों थीं, किंतु स्वयं श्रीकृष्ण धर्म और पांडवों के पक्ष में थे।”
कथा स्थल पर “नंद घर आनंद भयो” जैसे भजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय और धर्ममय हो गया।
इस अवसर पर गोयल परिवार द्वारा पं. नीरज महाराज एवं सभी श्रद्धालुओं का आदर-सत्कार किया गया।
अंत में माखन-मिश्री की महाप्रसादी का वितरण किया गया।
कार्यक्रम में नगर एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
