जेल से बाहर निकलने के बाद अपराध की पुनरावृत्ति न करें : न्यायाधीश श्रीमती तबस्सुम खान

जेल से बाहर निकलने के बाद अपराध की पुनरावृत्ति न करें : न्यायाधीश श्रीमती तबस्सुम खान

सिवनी मालवा। “जेल एक सुधार गृह है, यहां व्यक्ति को अपनी गलतियों से सीख लेकर एक नया जीवन शुरू करने का अवसर मिलता है। आप सभी से अपेक्षा है कि रिहा होने के बाद दोबारा अपराध की राह पर न चलें, वरना आपका पूरा जीवन बर्बाद हो सकता है।” यह बात जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती तबस्सुम खान ने विधिक सेवा सप्ताह के अंतर्गत उपजेल सिवनी मालवा में आयोजित विधिक जागरूकता शिविर में बंदियों को संबोधित करते हुए कही।

न्यायाधीश श्रीमती खान ने कहा कि जेल दंड का स्थान नहीं, बल्कि सुधार का केंद्र है, जहां बंदियों को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने और अपराधमुक्त जीवन जीने की प्रेरणा दी जाती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बंदी को यह अवसर प्राप्त है कि वह अपने जीवन में सुधार कर समाज की मुख्यधारा में पुनः शामिल हो।

श्रीमती खान ने आगे बताया कि यदि किसी बंदी के मामले में अधिवक्ता उपलब्ध नहीं है, तो मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क अधिवक्ता न्यायालय में उपलब्ध कराया जाता है। इस दौरान उन्होंने उपजेल के दो बंदियों के प्रकरणों में विधिक सेवा के अंतर्गत अधिवक्ता नियुक्त कराने की कार्यवाही भी कराई।

न्यायाधीश श्रीमती खान ने बंदियों से उनके परिजनों से मुलाकात, खानपान व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए।

इस अवसर पर उपजेल अधीक्षक ऐश्वर्य चंद्र मिश्रा, उपजेल के कर्मचारी, न्यायालय स्टाफ एवं बंदीगण उपस्थित रहे।

 

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