जिले में उर्वरक वितरण हेतु ई-टोकन प्रणाली सुचारू रूप से संचालित, अब किसान 07792-181 पर कॉल कर आसानी से करा सकते हैं पंजीयन

जिले में उर्वरक वितरण हेतु ई-टोकन प्रणाली सुचारू रूप से संचालित, अब किसान 07792-181 पर कॉल कर आसानी से करा सकते हैं पंजीयन

 

नरसिंहपुर। किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जबलपुर संभाग के नरसिंहपुर जिले में कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह द्वारा उर्वरक वितरण के लिए ई-टोकन प्रणाली प्रारंभ की गई है। यह व्यवस्था 4 नवम्बर 2025 से प्रभावी रूप से लागू की गई है और जिले में यह प्रणाली सुचारू रूप से संचालित हो रही है।

347 किसानों ने कराया पंजीयन

ई-टोकन प्रणाली शुरू होने के बाद किसानों द्वारा उत्साहपूर्वक भागीदारी दिखाई जा रही है।

  • 4 नवम्बर को 85 किसानों,
  • 6 नवम्बर को 100 किसानों,
  • 7 नवम्बर को 162 किसानों द्वारा टोकन बुक कराए गए।

    इस प्रकार अब तक कुल 347 किसानों ने ई-टोकन प्रणाली के माध्यम से पंजीयन कराया है।

कॉल के माध्यम से होगा टोकन बुकिंग

किसान अब घर बैठे ही 07792-181 नंबर पर कॉल करके प्रातः 10 बजे से शाम 6 बजे तक कार्य दिवसों में पंजीयन करा सकते हैं।
कॉल के दौरान किसान को अपनी समग्र आईडी, खसरा/बही नंबर, रकबा, ग्राम और तहसील की जानकारी देनी होगी। पंजीयन पूर्ण होने के बाद किसान को खाद वितरण की तारीख और समय तत्काल सूचित किया जाएगा।

जिले के किसान अपने नजदीकी सरकारी गोदाम या डबल लॉक केन्द्र — नरसिंहपुर, करेली, गोटेगांव, करकबेल, सालीचौका और गाडरवारा — में निर्धारित समय पर खाद प्राप्त कर सकते हैं।

पारदर्शिता और सुविधा बढ़ाने की पहल

कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह ने बताया कि इस प्रणाली का उद्देश्य किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना, पारदर्शिता बढ़ाना और लंबी कतारों से राहत दिलाना है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे जल्द से जल्द 07792-181 नंबर पर कॉल कर अपना टोकन बुक कराएं और इस सुविधा का लाभ उठाएं।

कलेक्टर सिंह ने कहा कि प्रशासन का लक्ष्य है कि “जिले के प्रत्येक किसान को आवश्यक खाद समय पर, पारदर्शी तरीके से और बिना किसी असुविधा के उपलब्ध हो सके।”

कृषि विभाग का सहयोग और जानकारी

उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, नरसिंहपुर ने बताया कि यह प्रणाली किसानों को एक सरल, पारदर्शी और त्वरित सेवा प्रदान करती है।
कॉल सेंटर के माध्यम से लगातार किसानों के फोन स्वीकार किए जा रहे हैं। विभाग ने स्पष्ट किया कि यदि कॉल वेटिंग में हो, तो किसान प्रयास जारी रखें — कॉल सेंटर ऑपरेटर हर कॉल को प्राथमिकता से संभाल रहे हैं।

प्रणाली से होंगे लाभ

  • किसानों को लंबी कतारों से मुक्ति मिलेगी।
  • समय और श्रम की बचत होगी।
  • खाद उपलब्धता की सटीक सूचना सीधे किसान तक पहुँचेगी।
  • वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित होगी।
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