नवरात्रि 2025: मातृशक्ति विशेष : मानसिक और शारीरिक रुप के स्वस्थ्य गृहणी ही एक मजबूत परिवार की नींव होतीं है – डॉ आकांक्षा बघेल

नवरात्रि 2025: मातृशक्ति विशेष : मानसिक और शारीरिक रुप के स्वस्थ्य गृहणी ही एक मजबूत परिवार की नींव होतीं है - डॉ आकांक्षा बघेल

डॉ आकांक्षा बघेल
डायरेक्टर एंड रेडियोलॉजिस्ट
बघेल सोनोग्राफी सेंटर, हरदा एवं
को-डायरेक्टर, बघेल पॉलीक्लीनिक, सिवनी मालवा
नेशनल जॉइंट कोऑर्डिनेटर IRIA समरक्षण
मातृशक्ति को प्रणाम, मेरी प्यारी माताओं और बहनों को मेरी तरफ से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं तभी पूरी होंगी जब आप भी मेरी तरह अपनी व्यस्ततम जीवन शैली में अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ का पूरा ध्यान रख रही होंगी।
मानसिक और शारीरिक रुप के स्वस्थ्य गृहणी ही एक मजबूत परिवार की नींव होतीं है। अक्सर ये देखने में आता है माताएं और किशोरियां झिझक वश, एक्सरसाइज, प्राणायाम और योग जैसी नित्य क्रियाओं को अपनी दिनचर्या में शामिल नहीं कर पातीं, और तो और दिनचर्या के कार्यों को ही एक्सरसाइज जैसा मान कर इसकी जरूरत को नजरअंदाज करती पाई जाती हैं। असल में तो रोज के कार्य कुछ ही जोड़ो पर बल देते हैं, जिससे लम्बे समय में उन्हीं विशेष जोड़ो पर एक ही तरह के मूवमेंट के कारण दर्द और घिसाव की समस्या हो जाती है, जबकि रोजाना शारीरिक व्यायाम सभी प्रकार के जोड़ों में बहु आयामी तरीके से रक्त प्रवाह बढ़ाने में मदद करते हैं, जिससे जोड़ अधेड़ उम्र तक भी सक्रीय रहते हैं, लेकिन व्यायाम की शुरुआत कम उम्र से ही हो तो ज्यादा फायदा होता है। नियमित व्यायाम से हीमोग्लोबिन बढ़ता है, हड्डियों का कैल्शियम कम नहीं होता, जिससे कमजोरी नहीं आती, दिमाग सक्रीय रहता है, सकारात्मकता से भरा रहता है, जीवन में अवसाद नहीं आता और अगर हमारी दिनचर्या अच्छी होती है, तो अनायास ही अगली पीढ़ी हमारे आचार व्यवहार का अनुकरण करती हैं, उन्हें अलग से कुछ सिखाना नहीं पड़ता।
ये तो थी स्वास्थय संबंधित वार्तालाप। अब मैं कुछ बातें उन नव दंपति से भी साझा करना चाहूंगी जिन्हें नन्हे कदमों की आहट सुननी है। वैवाहिक जीवन की शुरुआत में ही कुछ बेसिक जांचे जैसे हीमोग्लोबिन, थायराइड, अवश्य करवाना चाहिए। हमारे देश में महिलाओं में खून की कमी अत्यधिक है। जैसे ही गर्भ ठहरता है, प्रसूति विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें। सारी जांचे जरूरी होती हैं, उनके दिशा निर्देश के अनुसार जांचें अवश्य कराएं। पूरे गर्भकाल में कम से कम चार सोनोग्राफी जरूरी होती हैं, खास कर पहली तिमाही की सोनोग्राफी। पहली सोनोग्राफी से ही तय होता है कि डिलिवरी की तारीख क्या होगी और इसी समय हम इस बात का भी अंदाजा लगा पाते हैं कि कहीं बच्चे में आगे चलकर कमजोरी या मां को आगे ब्लड प्रेशर बढ़ने की समस्या का जोखिम तो नहीं है। अगर हो तो इसका इलाज भी आसान होता है, जो पहली तिमाही से लेने पे ही असर करता है। हमारे देश में गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप या हाइ ब्लड प्रेशर अत्यधिक मातृ और शिशु मृत्युदर के प्रमुख कारणों में से एक है। आगे की सोनोग्राफी में इस बात का पता चलता है कि बच्चा कितना बढ़ा है, कहीं कमजोर तो नहीं, गर्भ में पर्याप्त मात्रा में रक्त प्रवाह है कि नहीं, कहीं बच्चे को ऑक्सीजन की कमी तो नहीं है, इन सब बातों की जानकारी से हम इमरजेंसी डिलिवरी से भी बच जाते हैं और डिलिवरी के लिए सटीक समय निकाल पाने में सोनोग्राफी बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आइए इस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस में हम प्रण लेते हैं, हमारा और हमारी सखियों का स्वास्थ्य हमारी आपसी जिम्मेदारी है, जिसे इस जानकारी को साझा कर हम पूरा करेंगे, धन्यवाद।

error: Content is protected !!